धरा पर रब का रूप है ये, बस माँ ऐसी ही होती है [Hindi Poem on Mother]
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बच्चों को जब चोट लगे, तब आँखें भरके रोती है।
बच्चों को ना हो अभाव, अपनी खुशियाँ वह खोती है।
बच्चों की तबीयत खराब, तो सारी रात ना सोती है।
अलफ़ाज़ नहीं तारीफ़ के लिए, क्योंकि माँ ऐसी ही होती है।
रखती नौ माह हमें गर्भ में, असहनीय पीड़ा सहती है।
सदा खुश रहो मेरे बच्चों, माँ हमसे हरदम कहती है।
कितना भी दुःख दें बच्चे, तब अंतर्मन में रोती है।
गलत व्यवहार करें बच्चे, पर सदा ह्रदय में रखती है।
फिर भी देती ढेरों आशीष, क्योंकि माँ ऐसी ही होती है॥
सपने बुनती ख्याल भी रखती, घर में सबसे पहले जागे।
हमारी खुशियों की खातिर, दिन रात ना देखे बस भागे।
खिलाती हमको पीछे पड़के, बस खुद ही भूखी सोती है।
धरा पर रब का रूप है ये, बस माँ ऐसी ही होती है॥
जीवन में अपनी माँ के लिए, गर तुम कुछ करना चाहो।
ना दो उसको दर्द कोई, अश्क ना आँखों में लाओ।
हम सबको रोशन करने वाली, वो एक दैवीय ज्योति है
शब्द और मैं लाऊँ कहाँ से, हाँ माँ ऐसी ही होती है।
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