सोने की चिड़िया- भाग-१
24 सितंबर 2014 को जब मंगल यान सफलतापूर्वक मंगल पर पहुँचा तब पूरे देश में एक गौरवशाली उत्सव मनाया जाने लगा। हर तरफ देशभक्ति की लहर दौड़ने लगी , क्यूँ ना हो आखिर इस सफलता के बाद भारत के अतिप्रतिभाशाली वैज्ञानिकों ने पूरे विश्व में अपने देश को अंतरिक्ष सक्षमता में सम्पूर्ण रूप से दक्ष बनाके अपना लोहा मनवा दिया। Image source:- wikipedia अच्छा लगता है जब हमारा देश विश्व की रफ़्तार से कदम मिलाकर चलता है। इससे ना सिर्फ़ देश का अपितु देशवासियों का उत्थान भी निहित है। आज हमारा देश नाभिकीय शक्ति , अंतरिक्ष उपलब्धियों , सशक्त सेना से परिपूर्ण है। औद्योगिक विकास , इंफ्रास्ट्रक्चर प्रगति पर है। इतना कुछ होने के बाद भी हम विकासशील हैं। आज भी हम पूर्ण रूप से विकसित नहीं हैं आखिर क्यों ? कभी हम विश्वशक्ति हुआ करते थे , पर धीरे-धीरे हमारे लालच , स्वार्थ , भोग विलास का फायदा उठाकर बाहरी शक्तियों ने टुकड़ों में आके लूटा , फिर आकर राज करने लगे हम पर। पहले मुग़ल , फिर अंग्रेज़ इस तरह हम गुलामी के गहरे दलदल में फंसते चले गये। जब हमारे सम्मान को कुचला जा रहा था तब एक दर्द अंदर पनपके इस अपमानित और अभ...