Posts

इश्क़ में जब खामोशी की जुबां बात करती है [Hindi romantic Poem]

#poemonloveinhindi #lovepoem इश्क़ में जब खामोशी की जुबां बात करती है तब आँखे आँखों से मुलाक़ात करती हैं  बस फिर बन जाता है दिल तक का रास्ता  जुड़ जाता है एक हसीं सा राबता  कब दिल एक दूसरे की धड़कन में धड़कने लगते हैं  कब साँसों में यादों के सिलसिले चलने लगते हैं  कब एक का दर्द दूजे की तड़प बन जाता है  कब इश्क़ का ये सुरूर सर चढ़ जाता है  बिन बोले बस साँसों से ही गुफ़्तगू  होती रहती है  बस चाहत कई अरमानों के ख्वाब संजोती रहती है  एक दूजे की ख़ुशी ही बस जीने की वजह बन जाती है  चेहरों की तबस्सुम पल पल उनमे अपनापन लाती है  हर रुत में प्यार बरसता है ,हर मौसम अच्छा लगता है  बस दुनिया में ये एक रिश्ता सच्चा लगता है  एक पल भी ओझल ना हों बस दिल ये ही चाहता है  दीदार करे जब एक दूजे का सुकूँ तभी बस आता है 

फ़रेब

निकलके फ़रेब के जंगल से ,फिर काँटा चुभा फ़रेब का। फ़रेब के जंगल से निकलना भी, बस एक फ़रेब है।। चाहत को रौंद देते हैं ,प्यार को बदनाम करते हैं।  झूठ बोलने वाले ,यही बस काम करते हैं।। धोखा देने को अपना हुनर मानते हैं ये फ़रेब करने वाले।  इससे तो खुशनसीब होते हैं ,प्यार में मरने वाले।। और क्या रखा है अपने सीने  में ,इस बेदर्द ज़िन्दगी ने।  क्यों मेरी ज़िन्दगी का हर पल ,झुलसता हुआ सा है।। हर धड़कन कराह रही है मेरी ,हर सांस सिसकने लगी है अब।  या खुदा बस मौत देदे ,छूट गई अब जीने की तलब।।  क्यों हर बार ना चाहते हुए भी ,हिस्से में दर्द ही आता है।  लड़ूँ दर्द से अब मैं ,या दर्द को ही अपना सुकूँ बनालूँ।।

जीने नहीं देती हमको इच्छाओं की अंतहीनता

जीने नहीं देती हमको इच्छाओं की अंतहीनता।  ना पूरी हो तो ला देती हैं ये विचारों में संकीर्णता। हावी हम होने देते हैं जब खुद पर हम।  हर पल नाखुश से जीवन का रहता है हमको भ्रम।। पा लेते हैं जो कुछ हम उसकी खुशियाँ कब हैं मनाते।  अब वो ,फिर वो करते करते पाई हुई हम खुशियाँ गँवाते।  ये वो लहरें हैं जो साहिल से मिला नहीं करती।  जिसको भी डुबोदे ये लहरें लेकिन गिला नहीं करती।। होती इंद्रधनुष सी सतरंगी ,बनती जीवन को बेरंग।  पूरी होने की होड़ में करती हैं बस हमको तंग।  छोटा सा ये जीवन अपना क्यूँ इसको खुलके ना जियें हम। दिया जलाएं बस खुशियों का क्यूँ होने दें दुखों का तम  ।। जीवन ऐसे जीना है कि हर सांस गर्व करे हम पर।  पानाभी  है सबकुछ बस रखना नहीं ख़ालिशों का ज़हर।  खुद पर इन इच्छाओं को हावी नहीं होने देना है।  छोटी छोटी खुशियों को यूँ ही नहीं खोने देना है  ।। सबसे बड़ी इच्छा हो बस कि जीवन सार्थक हो जाए।  फिर चाहे अंतिम सांस को जिस पल आना हो आ जाये।  चेहरे पे रखकर ओज सूर्य स...

तीस्ता का सौंदर्य [Hindi Poem on River]

Image
ये कविता समर्पित है सिक्किम की सुन्दर घाटियों के बीच से निकलती तीस्ता नदी के लिए ,नदी जिसे हमारे देश में माँ का दर्जा  देते हैं क्योंकि ये निस्वार्थ होकर हम सबका ख्याल रखती है। जहाँ से ये गुज़रती हैं वह सब हरा भरा बना देती हैं। सबकी प्यास बुझाती हुई ,पंछियों के कलरव को जीवित  रखती हुई ,किसानो की थकावट मिटाके उनकी मेहनत को उनके चेहरे की हसीं बनाती हुई बहती है। जब मैंने तीस्ता माँ को उन घुमावदार और विषम रास्तों से स्वच्छंदता से बहते हुए देखा तब ऐसा लगा  तुम बस अपने आपको बिना बदले अडिगता से बढ़ते रहो रास्ते कैसे भी हो मंज़िल आपकी आपको ज़रूर मिलेगी।   लेकिन इस कविता में मैंने उनके सौंदर्य और मनभावन गुणों को शब्दों में उकेरने की कोशिश की है।   अगर आपको महसूस हो तीस्ता माँ का ममता भरा बहाव तो सूचित अवश्य करें।  दिनकर जैसे ओज से निकली ,वो मस्ती और मौज से निकली।  बहती तीस्ता लगती जैसे ,बेटी पिता की गोद से निकली।  बलखाती ,इतराती ,इठलाती ,अविरल बहती जाती।  चलो मेरे संग मस्ती भरके ,जैसे  कहती जाती।  कही...

Natural beauty

Image
प्रकृति माँ है तुम्हें नमन , निस्वार्थ हमें जीवित रखती हो। बगैर कुछ भी लिये हुए सतत ये ही करती रहती हो।       ना इक पल भी रूकती हो , ना इक पल भी थकती हो ।       तुम ही हो श्रोत अप्रतिम बल का तुम ही माँ महाशक्ति हो॥

Maa esi hi hoti hai

https://www.youtube.com/watch?v=Nfo-d2pL_y8 Bachho ko jab chot lage tab aankhen bharke roti hai. Bachho ki tabiyat kharab to raat bhar wo na soti hai. Bachho ko na ho abhaav apni khushiya wo khoti hai. Taarif ke liye shabd nahi kyuki Maa esi hi hoti hai. Rakhhke nau maah hame garbh me asahaniya pida sahti hai. Khush raho mere bachho maa humse hardam kahti hai. Kitna bhi dukh de bachhe unko sada hriday me rakhti hai. Galat vyavahaar kare bachhe tab antarman me roti hai. Fir bhi deti dhero aashish kyuki Maa esi hi hoti hai. Maa esi hi hoti hai………. https://www.youtube.com/watch?v=Nfo-d2pL_y8

जीने नहीं देती हमको, इच्छाओं की अंतहीनता

जीने नहीं देती हमको , इच्छाओं की अंतहीनता। ना पूरी हो तो ला देती हैं , ये विचारों में संकीर्णता। हावी होने देते हैं , इन सबको जब खुद पर हम। हर पल नाखुश से जीवन का रहता है हम सबको भ्रम॥ पा लेते हैं जो कुछ हम , उसकी खुशियाँ कब हैं मनाते। अब वह , फिर वह करते करते , पाई हुई खुशियाँ हैं गँवाते। ये वह लहरें हैं जो , साहिल से मिला नहीं करती। जिसको भी डुबोदे ये लहरें , लेकिन गिला नहीं करती॥ होती इंद्रधनुष-सी सतरंगी , करती जीवन को बेरंग। पूरी होने की होड़ में , करती हैं बस हमको तंग। छोटा-सा ये जीवन अपना , क्यूँ इसको खुलके ना जियें हम। दिया जलाएँ बस खुशियों का , क्यूँ होने दें दुखों का तम॥ जीवन ऐसे जीना है कि हर सांस गर्व करे हम पर। पाना भी है सबकुछ , बस रखना नहीं ख़ालिशों का ज़हर। खुद पर इन इच्छाओं को हावी नहीं होने देना है। छोटी छोटी खुशियों को यूँ ही ना खोने देना है॥ ये ही इक इच्छा हो बस कि जीवन सार्थक हो जाए। फिर चाहे अंतिम सांस को , जिस पल आना हो आ जाये। चेहरे पर रखकर ओज सूर्य सा , रूह को विदा करेंगे हम। मृत्यु के भी ने...